देब से दूरस्थ इच्छित बस्तु मंगाना

देब से दूरस्थ इच्छित बस्तु मंगाना

शाबर मंत्रो का गूढ़ रहस्य अर्थ नहीं बनता है परन्तु उस मंत्र के प्रणेता की मानसिक शक्ति से पुटित होकर मंत्र कार्य करता है । कोई भी बस्तु द्रब्य मंगानी हो तो इस मंत्र को सिद्ध करने के बाद प्रयोग करके दिखा सकते हो चाहे बह दूरस्थ हो , अन्तरिक्ष से बस्तु आपको प्राप्त होगी । जी हाँ यंहा आप सबके लिये देब से दूरस्थ इच्छित बस्तु मंगाना का सबसे पावरफुल ३मंत्र आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ ।

पहला मंत्र :

“ॐ नमो थ्री रूम चलूँ स्वाहा । तत और सत । बल और बुद्धि गंगा और यमुना गुटका और गुटकी द द द शव्द सांचा लक्ष्मण जाति का बाचा तत और सत ।”

इस मंत्र के सबा लाख जप करे । गूगल, दशांश धूप नारेल से होम करे तो मंत्र सिद्ध होबे । सोमबार गुरुबार से प्रारंभ करे । होली दीपावली एबं दशहरा अक्षय तृतीया पर मंत्र जाग्रत अबश्य करते रहे । यह मंत्र जिससे प्राप्त किया था उसको इसकी सिद्धि प्राप्त थी बैठे बैठे ही इच्छित बस्तु मंगा सकता था । अत: प्रयोग सत्य है ।

दूसरा मंत्र : ( जिन्न का )

“सिर पे साफा हाथ में सांग कसे है बख्तर कसी लगा बैठी उडतो आता है जिन्दबीर रणधीर धर्मध्वज फ़हराती आबे जिन्दबीर बलखातो आबे । जंहा बुलाऊं बहीं पधारे कलदारन के ढेर लगा रे लौग से बुलाऊं, लोबान से बुलाऊं, फुल से बुलाऊं  फुल में आबे जो  जो मांगू सो लाये एक पलक न देर लगाये , बुलाये बुलाये न आये , फलानी चीज न लाये तो किले का जींद बीर न कहाये, बजरंगी की सेबा में खटक लगाबे , काली मैया को रुलाबे, चांडाल की शराब में नहाबे, मेरा बुलाया न आये तो गुरु भोला की आन , शाबर बाबा को आदेश, मेरी भक्ति गुरु की शक्ति मंत्र सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र इश्वरो बाचा ।”

यह जिन्न का मंत्र है जो कब्रिस्तान में कब्र के पास सिद्ध किया जाता है । इसके मुबक्किल तथा कच्चे कलबे की साधना से भी यह कार्य मनचाही बस्तु का प्राप्त किया जा सकता है । परन्तु घर साफ़ सुथरा रहना चाहिये , गंदगी स्थान और गंदगी में रहोगे तो जिन्न नाराज होकर सिद्धि नष्ट कर देता है साथ साथ कुछ ना कुछ अनिष्ट करा देता है और वो स्थान छोड़कर हमेशा हमेशा केलिये जिन्न चला जाता है वापास आप लाखो बार प्रयाश करने पर भी ये सिद्धि कभी प्राप्त नहीं कर सकते हो । और एक बात आप ध्यान में रखकर कार्य करना चाहिये , जिन्न से बार बार कार्य ना कराये ।रक्षा के लिये सूअर दांत या हड्डी हमेशा पास में रख लिया करो ।

तीसरा मंत्र :

“ॐ नमो देबलोक देबख्या देबी जंहा बसे इस्माइल जोगी छप्पन भैरूं हनुमंत बीर भूत प्रेत देब्य कूं सारा मुगाबे पराई माया लाबे लाडू पेडा बरफी सेंब सिंघाड़ा ढांहब का पता मां मिश्री घेबर लौंग डोढा इलायची दाणा तले देबी किलकिले ऊपर हनुमंत गाजे इतनी बस्तु चाही न लाबे तो तेतीस कोटी देबता लाजे मिर्च जाबित्री जायफल हरड बहड़ बादाम छुआरा मुफर्रे रामबीर तो बता देब से लक्ष्मण बीर पकड़ाबे हाथ भूत प्रेत को चलाबे हाथ, हनुमन्त बीर लंका कूं धाया भूत प्रेत को साथ चलाया चाही बस्तु चली आबे हनुमंत बीर को सब कोई गाबे सौ कोसां की बस्तु लादे न लाबे तो एक लाख अस्सी हजार पीर पैगम्बर लजाबे ।”

बिधान – गांब के बाहर जो कुआँ हो बहां हनुमान की मूर्ति बनायें । धूप दीप करें । ७ दिन तक अढाई पाब तथा २१ दिन तक सबा पाब रोट का शक्कर के साथ भोग लगाबे । बाद में स्वयं उसे खाबें । जब कोई आबाज आबे तो बर मांग लेबें ।

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आचार्य प्रदीप कुमार – (मो) 9438741641 (Call/ Whatsapp)

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