अनुभूत दुर्भाग्य नाशक विधि:

प्रदोष के दिन शुक्लपक्ष में, शिवलिंग पर पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद, शुद्ध सुगंधित जल से अभिषेक करें। फिर चन्दन के इत्र को लगाएं, त्रिपुंड का अवलेप करें, बेलफल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, सुगंधित पुष्पों से शिवलिंग का श्रृंगार करें। गूगल, लोंग और कपूर की धूनी दें, 12 घी के दीपक को चन्द्राकार में जलाएं और 108 बार श्रीसूक्त का पाठ करें। माघ महीने के शुक्ल पक्ष में, प्रदोष के दिन, एक वर्ष तक इस प्रयोग का पालन करें। आप खुद देखेंगे कि आपका भाग्य परिवर्तित हो रहा है। यह एक अनुभूत प्रयोग है।

दुर्भाग्य नाशक दूसरा प्रयोग:
दुर्भाग्य से बचने और नाश करने के लिए एक अनुभूत टोटका यहां प्रस्तुत है। इस प्रयोग को पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ करने से दुर्भाग्य का नाश होता है और सौभाग्य में वृद्धि होती है। यह आपको सुख, समृद्धि और उन्नति प्रदान करता है।

इस प्रयोग की विधि निम्नलिखित है: सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले, एक रोटी लें। इस रोटी को अपने ऊपर से 31 बार वार करें। प्रत्येक बार वारते समय, निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण भी करें: “ऊँ दुभाग्यनाशिनी दुं दुर्गाय नमः।” इसके बाद, रोटी को कुत्ते को खिला दें या बहते पानी में डाल दें। इस प्रयोग से आप न सिर्फ खुद को बल्कि दूसरों को भी लाभ पहुंचा सकते हैं। बिना किसी संदेह के इस प्रयोग को मन से करने से आपको शीघ्र लाभ मिलेगा।

ज्योतिषाचार्य प्रदीप कुमार : मो. 9438741641 {Call / Whatsapp}
जय माँ कामाख्या

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